दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट की जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों ने Telegram की सीक्रेट चैट का इस्तेमाल किया था. यह फीचर एंड टू एंड एन्क्रिप्शन, सेल्फ डिलीट मैसेज और बिना क्लाउड बैकअप के चलता है, जिसकी वजह से असली चैट तक पहुंच पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है. जांच एजेंसियों को सिर्फ मेटाडाटा मिला है और अब वे पैटर्न एनालिसिस, लोकेशन डेटा और दूसरे डिजिटल क्लूज को जोड़कर नेटवर्क समझने की कोशिश कर रही हैं. यह मामला दिखाता है कि हाई एन्क्रिप्शन वाले मैसेजिंग टूल्स सुरक्षा जांच के लिए कितनी बड़ी चुनौती बन चुके हैं.
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